कैसे करें बढ़ते बच्चों की परवरिश




अधिकतर पेरेंट्स अपने बच्चों की परवरिश सिर्फ यह सोचते है की उनकी जरूरतों को पूरी करना जैसे खाने पीने ,पहनने ओढने और रोज की जरूरतों को पूरी करना ही समझते है | परन्तु बच्चों की परवरिश केवल उनकी जरूरतों तक ही सिमित नहीं होती बल्कि उनको दिए जाने वाले संस्कार ,अच्छी आदतें जिनसे वे आत्मनिर्भर बन सके |ये भी उतना ही महत्त्व रखता है जितना की जीवन जीने के लिए खाना पीना |अक्सर पालक इस बात से चिंतित रहते है की बच्चों की परवरिश कैसे करे जिससे वे आत्मनिर्भर और संस्कारी बन सके |

बच्चों के साथ दोस्ताना व्यवहार रखें-

आज कल जमाना बदल गया है अब वो जमाना नहीं रहा की जहाँ घर में बड़े जो बोल दिए वही आखरी फैसला है बच्चों के लिए |आज कल बच्चें अपने निर्णय लेने के लिए समर्थ हो गये है इसलिए पालकों को चाहिए की बच्चों के निर्णय को सुने और उन्हें उनके नजरिये से देखने की कोशिश करे और समझने की कोशिश करे |जहाँ वे गलत है वहा उन्हें समझाये उनके दोस्त बनकर |उनके दोस्त बनने की कोशिश करे ऐसा करने से बच्चें आपके पास आयेंगे और वो आपसे खुलकर बात कर पाएंगे |




उनके साथ समय बिताएं-

अक्सर पेरेंट्स और बच्चों के बीच दुरिया आ जाती है पेरेंट्स अपने बच्चों के साथ पर्याप्त समय नहीं बिता पाते जब बच्चों को अपने पेरेंट्स की जरुरत होती है तब वे उनके पास नहीं होते ऐसा करने से बचे |अक्सर ऐसी समस्या वर्किंग पेरेंट्स के साथ आती है वो अपने काम में बिजी हो जाते है और बच्चों को समय नहीं दे पाते |बच्चों को रोज नहीं तो छुट्टी वाले दिन अपना पूरा समय दे |

उन्हें शुरू से ही अनुशासन सिखाये-

बच्चों को बचपन से ही अनुशासन सिखाये  जब वो छोटे होते है तो पेरेंट्स उन्हें गलत बात पर भी नहीं टोकते की बाद में सिख जायेगा परन्तु ऐसा नहीं करना चाहिए उन्हें शुरू से ही अनुशासन करना सिखाना चाहिए | उन्हें गलत बात पर टोके और उन्हें सही चीज सिखाये |उन्हें अनुशासन में रहना सिखाये |कुछ पेरेंट्स बच्चों को छोटी छोटी बात में निर्देश देने लगते है उन्हें डाटते और मारने भी लगते है ऐसा करने से बच्चे और जिद्दी स्वाभाव के होते जाते है |

उन्हें आत्मनिर्भर बनाये

बचपन से ही बच्चो को आत्मनिर्भर बनाये छोटे छोटे फैसले उन्हें खुद लेने दे |जैसे उनकी रूचि जिनमे है वो करने का फैसला |इससे जब वे बड़े होंगे तो अपने फैसले खुद लेने में सक्षम होंगे|उनमे निर्णय लेने की क्षमता बढ़ेगी और जीवन में बड़ी बड़ी चुनौती का खुद सामना करेंगे |




बच्चों के सामने अभद्र भाषा का उपयोग न करे

बच्चो का मन कोमल होता है |उनके सामने बड़े जैसा व्यवहार करेंगे वो उसे तुरंत ही सिख लेते है |इसलिए अपनी भाषा पर नियन्त्रण रखे उनके सामने ऐसी कोई भाषा का उपयोग न करे जिससे वो अभद्र भाषा का उपयोग करने लग जाये |

 

Post Author: swati mishra

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